Indian Knowledge Systems Collected by Ashutosh Pareek

भारतीय ज्ञान-विज्ञान की अनवरत धारा

(The Unbroken Continuum of Indian Knowledge and Science) ऋग्वेद का यह मंत्र कहता है कि समान विचारों से युक्त हृदय और मन हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए संतुलित, संयमित और विकसित जीवन को प्रदान करते हैं। भारतीय ज्ञान परम्परा की अनवरत धारा ही एक ऐसे विश्व : एक मन और एक जीवन…

विज्ञान-वरदान-या-अभिशाप-explained-by-Ashutosh-Pareek
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वैज्ञानिक और तार्किक चिन्तन का परिणाम: सनातन दृष्टि

“संगच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते।।” ऋग्वेद 10.191.2 “साथ चलने, एक स्वर में बोलने और एक दूसरे के मन को जानने वाला समाज ही अपने युग को बेहतर बनाने की सामर्थ्य से युक्त हो सकता है और ऐसे युग में जीने वाले स्वयं के लिए बेहतर वर्तमान और आने…

Vedic Vision Fruits-Of-Hard-Work-explained-by-Ashutosh-Pareek
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वैदिक दृष्टि : जीवनीय, रक्षणीय और प्रेरणीय

“कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः। एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे॥” यजुर्वेद 40.2 “कर्म करते हुए सौ वर्षों तक जीने की इच्छा करो” इस बात को सुनते ही हम उसकी अनुपालना में लग जाते हैं, अच्छी बात है लेकिन वैदिक दृष्टि यहीं समाप्त नहीं होती। ये कर्म कैसे हों? ये हमारे जीवन, उसकी सुरक्षा, संरक्षा…