संस्कृतपत्रकारिता I Sanskrit Journalism

संस्कृत पत्रकारिता का अपना एक वृहद् इतिहास, वृहत्तर वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य है. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हिन्दी पत्रकारिता के विकास और विस्तार में संस्कृत विद्वानों की महती भूमिका रही है. १ जून १८६६ को प्रकाशित “काशीविद्यासुधानिधि:” (पण्डित-पत्रिका) से वर्तमान काल में प्रतिष्ठित सुधर्मा, संस्कृत-संवाद:, भारती, सम्भाषणसंदेशः, संस्कृतं भवितव्यम् आदि पत्र-पत्रिकाओं की अपनी विशिष्ट पहचान है. बदलते युग में संस्कृत पत्रकारिता के स्वरूप, पत्रिकाओं का इतिहास, वर्तमान और भविष्य, अपेक्षित परिवर्तन परिचर्चा होती रहनी चाहिए…